

वोह न्यू मार्केट का समां , वोह ब्रिजवासी की चाट ,
वोह टॉप न टाऊन की आइस क्रीम , वह उसमे थी कुछ बात.
वोह मिलन की मिठाई , वोह ICH का डोसा ,
वोह MP नगर की पाव भाजी और जैन का समोसा .
वोह सिटी का सफर , वोह पिपलानी की हवा ,
वोह भेल की रौनक और साकेत का समां .
वोह जनवरी की कडाके की सर्दी , वोह बारिशों के महीने
वोह गर्मी की छुट्टियाँ , जब निकलते थे पसीने .
वोह होली की मस्ती , वोह दोस्तों की टोली ,
वोह दिवाली के पटाखे वो जन्माष्टमी की रोली
वोह लहराके बाइक पर निकलना , वो जिंसी पे मिलना
वोह रात -रात तक गप्पे लगाना , मूड आए तो सलकनपुर निकल जाना
वोह जहांगीराबाद का आकाश होटल , वोह बड़ी झील से आती ठंडी लहरें
वोह सन्डे को झील का नज़ारा , वो VIP सुबह -सुबह भटकना
वोह ओल्ड भोपाल की गलियां ,
इतना सब कह दिया पर दिल कहता है और भी कुछ कहूं
वोह शहर है मेरा अपना , जिसकी अब क्या दूँ मिसाल
वोह शहर कोई और नहीं , मेरा अपना है भोपाल ....