रविवार, 21 सितंबर 2008

शमा के वजूद से ...


लाखो शमा जले और जले परवाने ,

इसी तरह शमा के वजूद से

वो ख़ुद मिट जाते है

भौरें भी गूंजते है, फूलो कि गंध पाने ,

आख़िर में फंस कर वो ख़ुद कैद हुए जाते है






6 टिप्‍पणियां:

Shastri JC Philip ने कहा…

एक अनुरोध -- कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन का झंझट हटा दें. इससे आप जितना सोचते हैं उतना फायदा नहीं होता है, बल्कि समर्पित पाठकों/टिप्पणीकारों को अनावश्यक परेशानी होती है. हिन्दी के वरिष्ठ चिट्ठाकारों में कोई भी वर्ड वेरिफिकेशन का प्रयोग नहीं करता है, जो इस बात का सूचक है कि यह एक जरूरी बात नहीं है.

वर्ड वेरिफिकेशन हटाने के लिये निम्न कार्य करें: ब्लागस्पाट के अंदर जाकर --

Dahboard --> Setting --> Comments -->Show word verification for comments?

Select "No" and save!!

बस हो गया काम !!

बलबिन्दर ने कहा…

इस नये चिट्ठे का एवं चिट्ठाकार का हार्दिक स्वागत

रंजन राजन ने कहा…

िचट्ठाजगत में आपका स्वागत है।
आपकी लेखनशैली अच्छी है। जमकर िलखें। साथ में दूसरों के िलखे पर ताकझांक कर िटप्पिणयां भी छोड़ें।
www.gustakhimaaph.blogspot.com

Pawan Nishant ने कहा…

ब्लाक जगत में आपका स्वागत है। इस कुनबे में जितने लोग जुड़ेंगे, हिंदी और उसका साहित्य जो अंकुरण को छटपटा रहा है, जल्द फूटेगा। शुभकामनाएं।

पवन निशान्त
http://yameradarrlautega.blogspot.com

shama ने कहा…

Aapka swagat hai...bohot, bohot mubarak baadke saath...aur Shatriji theek kehte hain, word varification hata den!

प्रदीप मानोरिया ने कहा…

सुंदर रचना सही चित्र के साथ धन्यबाद आपका हिन्दी ब्लॉग जगत में स्वागत है
आपको मेरे ब्लॉग पर पधारने का स्नेहिल आमंत्रण है